विकास की परिभाषा क्या है, चमचमाती सड़क, रोशन भवन या मंहगे मशीन ? दर्द से कराहते मरीज के नजरिये से देखें तो उसके लिए विकास का मतलब है सुलभ डाक्टर और आराम देने वाली दवा। एक बार सपाट सड़क न भी हो तो चलेगा, लेकिन जब किसी के जान पर बन आती है तो उसे दरकार होती है सिर्फ राहत की, और यह जिम्मा है स्वास्थ्य विभाग का, हर सरकारी अस्पताल में जरुरत के मुताबिक डॉक्टरों की तैनाती जाने कब हो पायेगी, पर फ़िलहाल दवा पहुंचने के आसार नजर आ रहे हैं।
भारत सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से मध्य प्रदेश सरकार द्वारा "सरदार वल्लभ भाई पटेल नि:शुल्क औषधि वितरण योजना" प्रारंभ की गई है जिसमे समस्त जिला चिकित्सालयों, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जरुरी दवा नि:शुल्क उपलब्ध रहेगी। अस्पताल पहुँचने वाले सभी मरीजों को ओपीडी समय में तथा अस्पताल में भर्ती मरीजों को 24 घंटे दवा दी जाएगी। दवाइयां, इंजेक्शन आदि के अलावा रोगियों के उपयोग में आने वाली सामग्री जैसे - डिस्पोजेबल सिरिंज, निडिल, आईवी केनुला, ड्रिप सेट एवं आपरेशन में काम आने वाले सर्जिकल सूजर आदि भी मुफ्त दिए जायेंगे।
देश के ख्याति प्राप्त दवा निर्माताओं से क्रय की गयी जेनरिक दवा, महंगे ब्रांडेड दवा जैसे ही होते हैं और इनके बनाने तथा असर करने में भी समानता होती है। इसलिए सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क उपलब्ध दवा के प्रति किसी तरह की शंका नहीं करनी चाहिए, बल्कि ये बाजार में उपलब्ध महंगे ब्रांडेड दवा से कई माइनों में बेहतर होती हैं। नि:शुल्क औषधि वितरण सम्बन्धी समस्त जानकारियां कंप्यूटर के माध्यम से अद्यतन रहेंगी, फिर भी किसी को दवा मिलने में कोई कठिनाई दिखे तो उसे टेली समाधान केंद्र के टोल फ्री नंबर 155343 पर शिकायत दर्ज करा देना चाहिए। इस टेलीफोन नंबर पर नि:शुल्क दवा वितरण सम्बंधित किसी भी समस्या या सुझाव को भी बताया जा सकता है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की पी.आई.पी. के अनुसार मध्यप्रदेश के लिए स्वीकृत राशि - (1) प्रदेश के 50 जिलों को 2011 की जनगणना के अनुसार औषधि उपार्जन हेतु - 5174.96 लाख, प्रदेश के 866 केन्द्रों के लिए स्वीकृत (फार्मासिस्ट, डाटा एंट्री आपरेटर, सपोर्ट स्टाफ) पद के लिए - 1402.92 लाख, दवा स्टोर हेतु कंप्यूटर क्रय - 3.40 करोड़, दवा वितरण केन्द्रों की स्थापना - 1200 लाख रूपए है । स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बने 5 सदस्यी समिति द्वारा किया जायेगा, जिनमे सीएमओ, सिविल सर्जन, कलेक्टर द्वारा नामांकित कोई अनु. जाति / अनु. जनजाति सदस्य एवं संयुक्त कलेक्टर प्रमुख हैं।
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प्रदेश में कुल 50 जिला अस्पताल, 56 सिविल अस्पताल, 333 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 1156 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं इस तरह कुल 1595 नि:शुल्क औषधि वितरण केंद्र बनाये गए हैं जबकि प्रसव केंद्र के रूप में संचालित 377 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही कर्मचारी तैनात होंगे इसलिए 50 सीएमओ कार्यालय, 50 जिला अस्पताल, 56 सिविल अस्पताल, 333 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 377 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हिसाब से 866 कर्मचारिओं की भर्ती हो रही है। शहडोल जिले में कुल 37 केन्द्रों पर दवा वितरित होगी जिनमे से 38 केन्द्रों में कर्मचारी तैनात होंगे (कुल स्वीकृत राशि- 116.08 लाख), अनूपपुर में 24 दवा वितरण केंद्र बनाये गए हैं, वहीँ 25 कर्मचारियों की नियुक्ति प्रस्तावित है (कुल स्वीकृत राशि- 82.53 लाख), इसी तरह उमरिया जिले में 16 दवा वितरण केंद्र हैं और 17 कर्मचारी पद स्वीकृत हैं (कुल स्वीकृत राशि- 65.63 लाख)। इस तरह पूरे प्रदेश के लिए कुल 6983.87 लाख की राशि स्वीकृत है। उक्त राशि का सही उपयोग हो और जरुरत मंद को नि:शुल्क दवा मिल सके इसके लिए सरकार के साथ हम आप सब आम जनता का दायित्व है की इस योजना पर आवश्यक ध्यान देते हुए इसे सफल बनाने के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करें।